लखनऊ: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने लोकसभा और राज्य की विधानसभा में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण के प्रावधान को लागू करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए संविधान के 131वां संशोधन विधेयक पेश किया जा रहा है। इसके साथ-साथ मोदी सरकार दो अन्य विधेयकों को लाने की तैयारी में है। इसके तहत लोकसभा में मौजूदा 543 सीटों की जगह 850 सीटों पर चुनाव होगा। इनमें राज्यों से 815 और केंद्रशासित प्रदेशों से 35 सीटों से सांसद चुनकर संसद तक पहुंचेंगे। विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। विधेयक गुरुवार 16 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जाएगा। संसद में 16 से 18 अप्रैल तक विधेयक पर चर्चा होगी। इन चर्चाओं से इतर अब यूपी की राजनीतिक तस्वीर बदलने की चर्चा शुरू हो गई है।क्या है यूपी में सीटों का गणित?
उत्तर प्रदेश में अभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव होता है। संसद में प्रदेश के 80 प्रतिनिधि चुनकर पहुंच रहे हैं। 543 सदस्यीय लोकसभा के लिहाज से देखें तो यूपी कुल सांसदों का 6.78 फीसदी राज्य से चुनकर भेजता है। इस गणित से देखा जाए तो 850 लोकसभा सीटों का गठन होने पर यूपी के हिस्से में 125 लोकसभा सीटें आ सकती हैं।क्या कहता है जनगणना का गणित?
यूपी में लोकसभा सीटों की संख्या अभी 1971 की जनगणना के आधार पर निर्धारित है। दरअसल, 1973 के परिसीमन के आधार पर यूपी में लोकसभा सीटों का निर्धारण किया गया था। उस समय यूपी और उत्तराखंड एक साथ थे। उत्तर प्रदेश की आबादी 1971 की जनगणना के अनुसार 8 करोड़ 38 लाख 49 हजार थी। 1973 के परिसीमन के आधार पर यूपी में लोकसभा की सीटों की संख्या 85 निर्धारित की गई। इसका अर्थ हुआ कि 9,86,459 वोटरों पर एक लोकसभा सीट।
2011 की जनगणना को देखें तो उत्तर प्रदेश की कुल आबादी 19,98,12,341 थी। इस आबादी के लिए लोकसभा के जनप्रतिनिधित्व की बात करें और औसतन 10 लाख की आबादी पर एक सांसद रखें तो सीटों की संख्या 198 से 200 तक हो सकती है। ऐसे में जनगणना 2011 के आंकड़े के आधार पर परिसीमन होता है तो प्रदेश में लोकसभा सीटों का समीकरण बदल सकता है।
प्रदेश में सबसे बड़ी लोकसभा सीट कौन है?
प्रदेश में आकार के लिहाज से देखा जाए तो सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र सोनभद्र का रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट है। यह करीब 250 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस सीट पर लोकसभा चुनाव 2024 के आधार पर कुल मतदाता की संख्या 17,23,538 है। इसमें पुरुष मतदाता 9,28,430 और महिला मतदाता 7,95,065 हैं।वहीं, गाजियाबाद लोकसभा सीट आबादी के लिहाज से यूपी का सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र है। लोकसभा चुनाव 2024 के आंकड़ों के हिसाब से इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 29,38,845 है।
प्रदेश की सबसे छोटी लोकसभा सीट कौन सी है?
यूपी की सबसे छोटी लोकसभा सीट की बात करें तो आबादी के लिहाज से बागपत सीट का स्थान आता है। इस जिले की स्थापना वर्ष 1977 में हुई थी। इस सीट पर कुल मतदाताओं संख्या 16,16,476 है। इसमें से पुरुष मतदाताओं की संख्या 8,97,150 और महिला मतदाताओं की संख्या 7,19,241 है।
यूपी में कैसे बढ़ी लोकसभा सीटें?
देश में अब तक चार बार परिसीमन आयोग का गठन हो चुका है। सबसे पहले 1952 में परिसीमन आयोग का गठन किया गया। परिसीमन के तहत यूपी की 52 लोकसभा सीटों पर एक और 17 लोकसभा सीटों पर दो सांसदों का चुनाव होता था। 1963 के परिसीमन के बाद भी यही स्थिति रही। वर्ष 1973 में हुए तीसरे परिसीमन में उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 85 कर दी गई। 2000 में उत्तराखंड के अलग होने के बाद यूपी में 80 सीटें रह गई। उत्तराखंड के खाते में 5 लोकसभा सीटें गईं।देश में स्वतंत्रता के बाद हुए पहले परिसीमन में देश में 494 लोकसभा सीटें गठित की गईं। वहीं, 1963 में सीटों की संख्या बढ़ाकर 522 कर दी गई। 1973 के परिसीमन में सीटों 543 तक बढ़ाए जाने के बाद इस पर पाबंदी लगा दी गई। 25 वर्षों तक सीटों का गणित न बदलने की बात कही गई। इसके बाद सीटों को बढ़ाए जाने पर 2001 में भी 25 सालों क रोक लग गई। अब 53 साल बाद एक बार फिर लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि की चर्चा शुरू हो गई है।