
बड़े तालाब के बोट क्लब और शीतलदास की बगिया पर संचालित कई निजी नावें नियमों को दरकिनार कर बेखौफ चलाई जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि बीते कई सालों से किसी भी निजी नाविक ने अपना लाइसेंस रिन्यू कराया है। वहीं नगर निगम के पास भी ऐसा कोई अद्यतन रिकार्ड नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पर्यटन विकास निगम के अलावा कितनी निजी नावें बड़े तालाब में संचालित हो रही हैं। यह स्थिति निगरानी तंत्र की कमजोरियों को उजागर करती है। हालांकि, जानकारी के अनुसार, बड़े तालाब पर 50 से अधिक निजी नावें वर्तमान समय में संचालित हो रही हैं।
बरगी हादसे के बाद नगर निगम ने एहतियातन बड़े तालाब में चल रही निजी नावों के संचालन पर अस्थायी रोक जरूर लगाई थी, जिसके बाद नाव के मालिकों ने नावों को बड़े तालाब में साइड में खड़ा कर दिया है, लेकिन निगम प्रशासन ने न तो किसी संचालक के खिलाफ ठोस कार्रवाई की और ना ही सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया। नावों के न चलने से बड़ा तालाब खाली नजर आया और बोट क्लब में बोटिंग करने के लिए आने वाले कई लोग मायूस होकर लौट गए।
निजी नावों के सुरक्षा उपकरणों की स्थिति और भी चिंताजनक है। कई नावों में लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं हैं, और जहां हैं भी तो वे सालों पुराने हो चुके हैं और खराब और जर्जर हालत में हैं। कई जैकेट के बेल्ट टूट चुके हैं, जिससे आपात स्थिति में उनका उपयोग करना भी हादसे को आमंत्रण देता है। इसके बावजूद पर्यटकों को बिना सुरक्षा के नाव में बैठाया जा रहा है। ऐसे में पर्यटकों की जान जोखिम में डालकर नाव संचालन किया जा रहा है।